ै। आप इसे बाथरुम में भी ले गई थी। अरे नया भजन डाउनलोड हो गया था ना, वही सुन रही थी। देखना क्या हुआ इसे? लगता है खराब हो गया है । थोडी देर धूप दिखा दो। चलने लगे शायद। वरना सर्विस सेंटर पर भेज देना भइया के हाथ। मगर जैसे कि मुझको पता था कि धूप भी बेअसर रही। पानी पिया हुआ फोन चल जाए ऐसा हजारो मेँ एक बार होता है। सर्विस सेंटर भेजना था अब फोन वारंटी मेँ था। पर यह एक लग टास्क था।भाई अलग ही मस्त था। कोई भी काम एक बार मेँ तो करता ही नहीँ था मा ने उसे बड़े ही ताने दिया और रोई भी। पर बेशर्म कोई असर नहीँ पड़ा। पापा को जब खुशखबरी मिली तो घर देर से आने लगे ओर सुबह जल्दी जाने लगे। माँ का मुंह उतर गया।फोन खराब हो जाने के कारण वह फुला कर बैठी रही लेकिन दूसरे दिन मैने देखा की, बच्चो जैसे मेरी माँ घर के कोने मेँ चुपके-चुपके आंसू बहा रही थी। मुझे उन पर दया आ गई। मैंने उनको दिलासा दिया मम्मी अभी वारंटी मेँ है। कोई बात नहीँ आपको कुछ मंगवाना हो तो मैँ इंटरनेट से अॉर्डर कर दूंगी। पर यहां एक दूसरी दिक्कत थी। पापा ने सही मौका देख कर बिल नहीँ भरा।जिस से इंटरनेट भी कट गया था। मेरी बेचारी मेरी माँ के पास कुछ करने को नहीँ था न फोन, न ऑनलाइन शॉपिंग, कुछ नहीँ। माँ खुद को भी कोश्ती रहती। किसी भी चीज की अति अच्छी नहीँ होती। देखा ना मैंने कर दी तो भूगत भी लिया। मेरी बेवकूफी से देखो कितना बड़ा नुकसान हो गया। मुझे कोई भी खुशी कभी कहाँ मिली है । हर बार एसा ही होता है। माँ गुमसुम सी रहने लगी। सच मेँ लानत के बराबर है। अच्छे खासे का जीवन बर्बाद कर देती है। मुझे खुद भी पहले की तरह घंटो कंप्यूटर, फोन मेँ सर खपाना अच्छा नहीँ लगता था। बल्की अब तो मेरा नया शौक था। नई नई तरह के खाना बना के सब को खिलाना। पर मेरी माँ का नया वाला सौख उन से छिन गया था। दिन भर फुन- फुन करके काम करती रहती। माँ दोपहर के समय आलतू-फालतू सीरियल देखते रहती। लेकिन जहाँ भी मोबाइल का विज्ञापन आता झट से चैनल बदल देती। अभी एक दिन पहले चहकती हुई माँ अचानक मूह लटकाये घुम रही थी। मैंने पापा से बात की तो बोले "अरे पागल हो गए हो क्या तुम। ये तो अच्छा हुआ खुद ही खराब हो गया। वर्ना मैँ तो मौका पाकर खुद कुछ कर डालता। २-३ तीन दिन एसे ही रहने दो ना, अपने आप ठीक हो जाएगी। अरे तुम से पहले से जानता हूँ इन को।" हॉव रूड। सारे मर्द एकदम दम बेदर्द होते है।
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