ो कब से सौख लग गया कॉस्मेटिक्स का? अरे बहुत सस्ता था ना। ट्राई करने मेँ क्या जाएगा? महीने-महीने भर का सामान मंगा लिया। तेरा वाला यूज करने की जरुरत नहीँ पड़ेगी। माँ आज कल मेरी कॉस्मेटिक यूज रही थी। अब समझ मेँ आया कि इतनी जल्दी खत्म कैसे हो रहे थे। फिर फुदकती हुई चेंज करने के लिए मेरे कमरे मेँ चली गई। पर एक घंटे तक नहीँ निकली। डाबर लाल दंत मंजन करने वाली मेरी माँ आज फाउंडेशन लगा रही थी। इसी को कहते हैं क्रांति। माँ को ये याद नहीँ रहा कि इस गुरुवार का भजन अपने घर पे रखा है। जब ऐसा होता है तो माँ पापा और भइया को पहले की अल्टीमेटम दे देती है कि आठ बजे से पहले घर नहीँ आना है। माँ को सारी पहने का मौका नहीँ मिला लेकिन दिखाने का मौका वो नहीँ चूकी। तकरीबन 25 औरतेँ घर पर थी और सब भगवान को भूल के माँ की सारी हाथ से सहला रही थी। मेरी आंखो ने तो वो भी नजारा देखा है जब माँ उस शाम सबको भजन डाउनलोड करना सिखा रही थी, और ऑनलाइन शॉपिंग करना भी। एंड्रॉयड माँ का वायरस फैलता जा रहा था। ना सिर्फ़ इतना हर महीने सारी का पार्सल का सिलसिला शुरु हो गया। घर मेँ ये बात आम हो गई थी तो मैं जब भी कॉलेज से घर आती तो मुझको बस अपने सेल फोन ही दिखाई देती थी। इतनी सातिर थी कि घर के कामों से कभी फुर्सत ना पाने वाली मेरी माँ ना जाने कितनी तेजी से सारे काम करके फुर्सत निकाल लेती थी। खाना लगाने के लिए जब मैँ उनको आवाज लगाती। तो कहती हां दस मिनीट। वह जो की दो घन्टे से कभी कम नहीँ होते थे। मैं चिड़ जाती। "हे भगवान, पता नहीँ कौन सा ग्रह सवार है इन पे। दिन भर फोन।" खाना दोगी या फिर भूखी रह आऊंगी मैं। खुदी नहीँ बना सकती क्या? जल्दी सीख ले। देख तो कितनी सारी नई नई रेसिपीज है इंटरनेट पर। इनको देख करके बनाया करना। माँ की आदत से मुझे वो सब करवा दिया जो मैंने डांट खा के भी कभी नहीँ किया था। आज मैं सिर्फ ना खाना बनाती हूँ, साथी पापा-भैया को भी बना के खिलाती हूँ। मैं माँ की सारी मंगवाने की लत से दुखी हो चुकी थी। पता नहीँ इंटरनेट से लिंक भी मिल जाते थे कैसे? मेरे सामने आते ही खुली साइट को बंद कर के एक दम मासूम से बैठ जाती थी। मगर मुझसे होशियारी कहाँ से चलती। मेरे मना करने के बावजूद वो चुपके से अॉर्डर कर देती थी। शायद मैँ दोपहर मेँ सोती थी तब। माँ एक दम बच्चे से हो गई थी। मेरी सारी लानते उनके उस फोन को पड़ रही थी।

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