। मैँ समझ गई की बेचारी वह खुद भी उसे सर्विस सेंटर पे ले गई होंगी।ऐसा है मैडम सर्किट भी गया है और स्क्रीन भी। सब चेंज करना पडेगा। कुछ खर्चा है क्या? माँ ने पूछा। वॉरेन्टी में है तो खर्चा नहीँ होगा।पर दिल्ली भेजना पड़ेगा। यहाँ नहीँ बनेगा। अच्छा तो फिर कितना टाइम लगेगा? एक महीना लग जाए मैडम। माँ का चेहरा पूरी तरह मुरझा गया। एक महीना। हाँ मैडम इतना तो लग ही जाएगा। उनके पास उसके सिवा कोई और चारा भी क्या था? वह फोन को सेंटर पे देकर वापस आ गए। बाद मेँ मेरे कई बात पूछने पर उन्होने बेैमन सब बात बता दी। और फिर अपनी रसोई पूरी तरह संभाल ली। मुझको भइया और पापा पर इतना गुस्सा आया। जो मैं बता भी नहीँ सकती। मन कर रहा था दोनोँ को सामने बैठकर डांट दिलाऊ।पर क्या फायदा? दो चार दिन एसे ही बीते। घर मेँ सब कुछ नॉर्मल होने लगा था। सारियों और दूसरे पार्सलों का सिलसिला अब थम चुका था। सब कुछ ठीक लग रहा था, माँ को छोड कर। पापा ने तो कहा था कि दो तीन दिन मेँ सब ठीक हो जाएंगा। लेकिन ऐसा नहीँ हुआ। मुझे समझ नहीँ आ रहा था कि मम्मा का मूड ठीक करने के लिए क्या करुँ? हम दोनो रोज दोपहर चुपचाप अपने कमरे मेँ ही रहते। फिर एक दोपहर मेैंने माँ को खुद पकडा। माँ ये देखो ये वाली सारी आज कल नहीँ निकली है । तू क्या करेगी सारी का? अभी तेरे काम नहीँ आएगी और जबतक पहनने लगेगी तब तक और नई आ जाएेगी। माँ मैँ तुम्हारे लिए देख रही थी। रहने दे। मैँने वैसे भी काफि फिजूल खर्च कर लिया हे। इसमेँ देखने मे पैसे थोडे ही लग रहे हे। क्यों? इंटरनेट पैक नही खप रहा है क्या? ऐसे भी आधे से ज्यादा हर महीने वेस्ट हो जाता है। तुम देख तो लो खाली। माँ उठ कर मेरे फोन मेँ देखने को तेयार हो गए। अब सब ठीक हो जाएगा। पर तब ही कर्म-नासि मेरा फोन हेंग हो गया। मैंने बेट्री निकाल के लगाई और कई बार ऑन ऑफ किया। पर नहीँ। जैसे जान बुझ के नाटक कर रहा हो। मुझको इतनी तेज गुस्सा आया कि मैं उसको अपनी हथेली पर पीटने लगी। एक अच्छा काम करने जाओ और सब नाटक होगा। ये स्मार्टफोन है या बेवकूफ फोन है। "तू अपने पापा की तरह है एकदम।" मुझे गुस्सा होते हुए देख के माँ ने बड़े प्यार से बोला। अब देखो ना आज ही परेशान करना था इसे। माँ ने मेरे हाथ से फोन लिया और उसे ऑफ करके ऑन किया। चमत्कार!! मेरा फोन एक ही बार मेँ शुरु हो गया।और माँ ने मुझे फोन देते हुए कहा "मेहंगी चीजे होती है ये सब। ठीक से इस्तेमाल किया कर। लंबा चलेगा।" मुस्कराने लगी। माँ मेरा इरादा कब से समझ चुकी थी और मेरा फोन मुझे थमाते हुए बोली "अब जरा देख की नए हैंड बैग पर कोई ऑफर्स चल रहा है क्या? अगले महीने मीनू की शादी मेँ गिफ्ट करने के लिए कुछ मंगाते है।"
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